Paddy Farming Tips: खेतों में धान की रोपाई हो गई पूरी, फसल के दुश्मनों की भी होने वाली है एंट्री, जानें इसके बचाव
आजमगढ़। प्रदेश के किसान इन दिनों धान की रोपाई में जुटे हुए हैं। अधिकतर खेतों में रोपाई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन अब फसल की सही देखभाल करना भी जरूरी है। अगर धान की फसल को समय पर सुरक्षित न किया गया, तो खरपतवार और कीटों का हमला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
खरपतवार
धान की रोपाई के 15 से 20 दिन बाद ही खेतों में खरपतवार उगने लगते हैं। ये फसल के पोषक तत्वों और पानी को चुराकर उसकी वृद्धि रोक देते हैं। अगर इन्हें समय पर नियंत्रित न किया जाए, तो पैदावार पर बुरा असर पड़ता है। खरपतवार दो तरह के होते हैं – चौड़ी पत्ती वाले और संकरी पत्ती वाले। इन दोनों को नष्ट करने के लिए सही दवाओं का उपयोग करना चाहिए।
कैसे करें खरपतवार पर नियंत्रण?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडेय के अनुसार, बिसपायरीबैक-सोडियम नामक दवा खरपतवार नियंत्रण के लिए कारगर है। इसका उपयोग इस तरह करें:
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80 मिलीलीटर दवा प्रति एकड़ में लें।
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इसे 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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अगर खेत में ज्यादा खरपतवार हैं, तो मेटसल्फ्यूरॉन 8 ग्राम मिलाकर भी छिड़काव कर सकते हैं।
छिड़काव के समय इन बातों का रखें ध्यान:
✔ छिड़काव तेज धूप में करें।
✔ छिड़काव के 3-4 घंटे बाद तक खेत में पानी न लगाएं।
✔ दवा का छिड़काव समय पर करें, नहीं तो खरपतवार बढ़कर फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्राकृतिक तरीके से भी कर सकते हैं बचाव
अगर किसान रासायनिक दवाओं का कम उपयोग करना चाहते हैं, तो हाथ से निराई-गुड़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा, जैविक खरपतवारनाशी जैसे नीम की खली या गोमूत्र का भी उपयोग किया जा सकता है।